यूपी का ‘डबल एजेंट’ सरकारी बाबू जय प्रकाश सिंह: 17 साल, 2 जिले और 2 सरकारी नौकरियां; RTI ने खोला राज, अब मिली 7 साल की जेल!

बाराबंकी (इंद्र यादव) बाराबंकी,अगर आपको लगता है कि आप ऑफिस के काम से बहुत थके हुए हैं, तो जरा उत्तर प्रदेश के जय प्रकाश सिंह जी से मिलिए (शायद अब जेल में मिलें)। इन्होंने ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ को एक नई ऊंचाई दी और साबित कर दिया कि इंसान एक समय में दो नावों पर न केवल सवार हो सकता है, बल्कि 17 साल तक उन नावों को दौड़ा भी सकता है!
टाइम मैनेजमेंट या जादूगरी
जय प्रकाश जी ने मार्वल के सुपरहीरोज को भी पीछे छोड़ दिया। 1979 में प्रतापगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में ‘नॉन-मेडिकल असिस्टेंट’ बने, लेकिन शायद सेवा का भाव इतना उमड़ा कि 1993 में बाराबंकी के शिक्षा विभाग में शिक्षक भी बन गए।
सोचिए, सुबह शायद बच्चों को ‘क से कबूतर’ पढ़ाते होंगे और दोपहर बाद स्वास्थ्य विभाग की फाइलों में ‘ख से खटमल’ मारते होंगे। एक जिले में चॉक उठाते, तो दूसरे में इंजेक्शन! रजनीकांत भी सोच रहे होंगे कि यह स्टाइल तो मैंने भी ट्राई नहीं किया।
RTI: विलेन जिसने ‘पार्टी’ खराब कर दी
सब कुछ मक्खन की तरह चल रहा था, दोनों हाथों में सरकारी लड्डू थे और जेब में डबल सैलरी। लेकिन तभी एंट्री हुई एक ‘RTI’ की। बाराबंकी के प्रभात सिंह ने बस एक सूचना क्या मांगी, जय प्रकाश जी का ‘डबल रोल’ वाला पर्दा ही गिर गया। विभाग जो 17 साल से कुंभकर्णी नींद सो रहे थे, अचानक ऐसे जागे जैसे बिना अलार्म के सोमवार की सुबह!
अदालत का ‘रिटायरमेंट’ प्लान
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा सिंह ने इस ‘प्रतिभा’ को पहचानते हुए उन्हें अगले 7 साल के लिए एक नई ‘सरकारी बिल्डिंग’ (जेल) में शिफ्ट कर दिया है।
इनाम: 7 साल की चक्की पिसाई।
फीस: 30 हजार का जुर्माना।
रिटर्न गिफ्ट: 17 साल की पूरी सैलरी अब सरकारी खजाने में वापस जमा करनी होगी। (यानी ‘बाय वन, गेट वन फ्री’ वाला ऑफर अब ‘पे बैक ऑल’ में बदल गया है)।
सिस्टम को ‘सलाम’
वाह रे हमारा सिस्टम! 17 साल तक ऑडिटर्स को लगा होगा कि जय प्रकाश जी के पास ‘पुष्पक विमान’ है जो पलक झपकते जिला बदल लेते हैं। डिजिटल इंडिया तो अब आया है, पर जय प्रकाश जी ने तो 90 के दशक में ही ‘क्लाउड कंप्यूटिंग’ (बिना दिखे काम करना) शुरू कर दी थी।
मेहनत इतनी खामोशी से करो कि तुम्हारी सफलता शोर मचा दे, लेकिन इतनी “डबल मेहनत” भी मत करो कि पुलिस शोर मचाती हुई आ जाए!


