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डिप्टी एसपी ऋषिकांत शुक्ला निलंबित, 10 साल में 100 करोड़ की 'कानूनी' संपत्ति का 'आरोप'!

उत्तर प्रदेश पुलिस में भ्रष्टाचार का ‘मेगा खुलासा’

लखनऊ/कानपुर(इंद्र यादव,ईशान टाइम्स)।

अरे वाह! योगी सरकार ने एक बार फिर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कर दी – इस बार भ्रष्टाचार के ‘आइसबर्ग’ की नुकीली चोटी पर! मैनपुरी के डिप्टी एसपी ऋषिकांत शुक्ला को निलंबित कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने मात्र 10 साल में 100 करोड़ की संपत्ति जोड़ ली। अरे भाई, ये तो कोई ताज्जुब की बात नहीं – पुलिस वाले तो ‘सेवा’ करते हैं ना, सेवा का फल जो मिलता है! एसआईटी की रिपोर्ट कहती है कि ये संपत्ति ‘आय से अधिक’ है। अरे, आय से अधिक। शायद उनकी ‘अज्ञात आय के स्रोत’ कोई लॉटरी टिकट या क्रिप्टो माइनिंग थे, जो रिपोर्ट में छूट गए! कानपुर का ‘कानूनी माफिया’ कनेक्शन
शुक्ला जी 1998 से सब-इंस्पेक्टर बने, फिर प्रमोशन पर प्रमोशन – जैसे कोई आईएएस अफसर की तरह! कानपुर में 10 साल गुजारे, जहां वे ‘चर्चित वकील’ अखिलेश दुबे के ‘करीबी’ थे। दुबे भू-माफिया। अरे नहीं, वो तो ‘प्रॉपर्टी कंसल्टेंट’ होंगे! आरोप है कि शुक्ला ने दुबे गैंग के साथ मिलकर लोगों को ‘झूठे मुकदमों’ में फंसाया, जमीनें ‘कब्जा’ करवाईं और ठेकेदारी से ‘काला धन’ कमाया। वाह, क्या मल्टी-टास्किंग! पुलिसिंग, माफिया मैनेजमेंट, रियल एस्टेट – सब एक साथ! पत्नी प्रभा शुक्ला तो दुबे के बेटे-भतीजे के साथ कंस्ट्रक्शन कंपनी चला रही थीं। फैमिली बिजनेस, भाई! बेनामी संपत्ति। वो तो ‘टैक्स प्लानिंग’ का नया नाम है! 12 जमीनें, 11 दुकानें – कुल 92 करोड़ की ‘बाजार मूल्य’! कानपुर के आर्यनगर में दुकानें पड़ोसी देवेंद्र दुबे के नाम पर बेनामी। अरे, पड़ोसी मदद कर रहे हैं, क्या गुनाह। तीन संपत्तियां दस्तावेजों के बिना, लेकिन पैन नंबर से जुड़ीं। पैन कार्ड तो जादू की छड़ी है – कुछ भी जोड़ देता है! और हां, बेटे की शादी ‘ईटरनिटी रिसॉर्ट’ में – 200-250 करोड़ की! बारात में एडीजी, एसपी नाचे। अरे, पुलिस वाले तो ‘ड्यूटी’ पर थे – डांस फ्लोर की सुरक्षा कर रहे थे! काला धन फ्लैट्स में निवेश। वो तो ‘स्मार्ट इन्वेस्टमेंट’ है, स्टॉक मार्केट से बेहतर रिटर्न! गृह सचिव जगदीश ने ‘तत्काल’ निलंबन का आदेश दिया – वाह, क्या स्पीड! डीजीपी को विजिलेंस जांच की सिफारिश। बैंक खाते, ट्रांजेक्शन चेक हो रहे हैं। अन्य अधिकारी जैसे संतोष पांडेय भी लाइन में। शुक्ला कहते हैं आरोप ‘बेबुनियाद’। बिल्कुल, शायद वो ‘ईमानदार भ्रष्टाचार’ कर रहे थे! मैनपुरी से हटाए गए – अब शायद ‘रिटायरमेंट होम’ में आराम करेंगे, अपनी 100 करोड़ की ‘पेंशन’ के साथ। ये मामला पुलिस में भ्रष्टाचार की ‘पोल खोल’ रहा है। अरे, पोल तो पहले से खुली है – बस अब ‘सेल्फी’ ले रहे हैं! योगी जी की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ – कितनी हुईं अब तक! 10 -100 विपक्ष कहता है ‘टिप ऑफ द आइसबर्ग’। हां, बाकी आइसबर्ग तो ‘फ्रीज’ में सुरक्षित है, अगले चुनाव तक! लंबी तैनातियां, माफिया गठजोड़ – ये तो यूपी पुलिस का ‘ट्रेडिशनल डांस’ है, जैसे बारात में नाचना!
पुलिस महकमे में ‘हड़कंप’! नहीं भाई, ‘हंसी का माहौल’ है – अगला नंबर किसका! शासन कहता है ‘कोई समझौता नहीं’। हां, समझौता तो सिर्फ माफिया से होता है! आगे और ‘चौंकाने वाले तथ्य’ आएंगे – जैसे, शुक्ला जी ने 100 करोड़ से ‘चंदा’ दिया था किसी मंदिर को! उत्तर प्रदेश पुलिस जहां सेवा का मतलब ‘सेविंग्स’ है, और भ्रष्टाचार ‘बिजनेस मॉडल’! जय हो!

— इंद्र यादव (ईशान टाइम्स),
indrayadavrti@gmail.com ……🖊️…..🙏

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